हरिद्वार, उत्तराखंड – श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा के परम श्रद्धेय महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरि जी, जिन्हें “परमहंस योगी” के नाम से भी जाना जाता है, वर्तमान समय में सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार एवं राष्ट्र जागरण के एक अग्रणी संत के रूप में पूरे विश्व में ख्याति प्राप्त कर चुके हैं। वे हिंदू रक्षा सेना, सनातन धर्म महासंघ और धर्म संसद के राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा भारत साधु समाज के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री जैसे अनेक महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।
ब्रज क्षेत्र (उत्तर प्रदेश) में जन्मे स्वामी जी की माता का नाम नारायणी देवी था। शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने एम.ए., एल.एल.बी. तथा कंप्यूटर इंजीनियरिंग की डिग्रियाँ प्राप्त कीं। राष्ट्र सेवा की भावना से प्रेरित होकर उन्होंने लगभग 15 वर्षों तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्णकालिक प्रचारक के रूप में कार्य किया।
धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र में योगदान
बाल्यकाल से ही राष्ट्र सेवा और सनातन धर्म के लिए समर्पित स्वामी जी ने 1985 से श्री राम जन्मभूमि आंदोलन में विशेष सक्रिय भूमिका निभाई। वे 14 वर्षों तक गौ सेवा व गौ रक्षा में पूर्ण समर्पण के साथ कार्यरत रहे। उनका तप, साधना और सेवा भाव उन्हें “परमहंस योगी” के विशेष नाम से प्रसिद्ध करता है।
अध्यात्मिक यात्रा एवं प्रेरणादायक साधना
गंगोत्री हिमालय में साधना के दौरान उन्हें कई दिव्य अनुभव प्राप्त हुए और सूक्ष्म शरीर में रह रहे सिद्ध संतों का साक्षात्कार प्राप्त हुआ। उन्होंने तीन वर्षों तक कठोर हठयोग साधना की। उनकी दीक्षा का मूल मंत्र है – “मम दीक्षा राष्ट्र रक्षा, मम दीक्षा हिंदू रक्षा।”
सम्मान और उपलब्धियां
स्वामी जी को “उत्तर प्रदेश रत्न” से नवाजा गया है और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा भारत के विशिष्ट संत के रूप में सम्मानित किया गया है। वे वर्तमान में श्री बालाजी धाम, बालाजी नगर आर्य नगर (गाजीवाली), श्यामपुर कांगड़ी, हरिद्वार में पीठाधीश्वर के रूप में कार्यरत हैं और श्रीमद् भागवत कथा, राम कथा एवं शिव पुराण के प्रवक्ता के रूप में संपूर्ण विश्व में धर्म का प्रचार कर रहे हैं।
