हिन्दू रक्षा सेना के प्रदेश मंत्री रामानुज जी ने महाराजा अग्रसेन जी की जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि महाराजा अग्रसेन जी भारतीय समाज में न्याय, समानता और सहयोग के प्रतीक थे। उन्होंने जीवनभर जाति-धर्म के भेदभाव से ऊपर उठकर सभी को एक परिवार की तरह देखने की सीख दी।

रामानुज जी ने बताया कि महाराजा अग्रसेन जी की नीति “एक रुपया और एक ईंट” ने समाज में आर्थिक सहयोग और परस्पर सहायता की परंपरा स्थापित की, जिससे हर परिवार को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा मिली।


उन्होंने कहा – “महाराजा अग्रसेन जी की शिक्षा आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। अगर हम उनके आदर्शों को अपनाएं तो समाज में कोई भूखा या बेघर नहीं रहेगा। उन्होंने जो रास्ता दिखाया वह हमें आपसी भाईचारे, सेवा और समृद्धि की दिशा देता है।”

रामानुज जी ने युवाओं से आह्वान किया कि वे अग्रसेन जी के जीवन से प्रेरणा लें और समाज में निस्वार्थ सेवा, ईमानदारी और एकता के मूल्यों को अपनाएं।


अंत में रामानुज जी ने सभी को महाराजा अग्रसेन जी की जयंती पर शुभकामनाएं दीं और समाज में सौहार्द, सहयोग व न्याय के उनके संदेश को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।

महाराजा अग्रसेन जी के बारे में जाने

महाराजा अग्रसेन प्राचीन भारत के एक आदर्श राजा और समाज सुधारक थे। वे अग्रवाल समाज के आदिपुरुष माने जाते हैं और व्यापार, सेवा, समानता और सहयोग की महान परंपरा के संस्थापक थे।

जन्म और वंश

महाराजा अग्रसेन जी का जन्म त्रेतायुग में हुआ माना जाता है।

महाराजा अग्रसेन का जन्म क्षत्रिय कुल में हुआ था, वे सूर्यवंशी राजा वल्लभ सेन के पुत्र थे।

उनका विवाह मधवी देवी से हुआ था, जो नागवंश की राजकुमारी थीं।

उन्होंने अपनी राजधानी अग्रेय (वर्तमान हरियाणा के हिसार क्षेत्र) में बसाई।

विचारधारा और सिद्धांत

महाराजा अग्रसेन जी का शासन न्यायप्रिय और जनकल्याण के लिए प्रसिद्ध था।
उनके मुख्य आदर्श:

1. “एक ईंट और एक रुपया” की नीति

जब कोई नया परिवार उनकी नगरी में आता था, तो हर घर से एक ईंट और एक रुपया दिया जाता था।

ईंट से नया घर बनाया जाता और रुपया जीवन शुरू करने के लिए सहारा देता।

यह नीति समाज में समानता, सहयोग और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देती थी।

2. समानता और सहयोग

उन्होंने जाति, वर्ग, धर्म में भेदभाव नहीं किया।

समाज के हर व्यक्ति को समान अधिकार और सम्मान दिया।

3. अहिंसा और करुणा

महाराजा अग्रसेन जी ने शिकार और हिंसा का त्याग किया और अहिंसा का संदेश दिया।

4. व्यापार और समृद्धि

उन्होंने अपने नागरिकों को व्यापार और कृषि में प्रोत्साहित किया, जिससे उनकी नगरी समृद्ध हुई।


विरासत

महाराजा अग्रसेन जी के आदर्शों पर आधारित समाज आज “अग्रवाल समाज” कहलाता है।

उन्होंने सिखाया कि “समानता, सहयोग और सेवा ही समृद्ध समाज की नींव है।”

आज भी देशभर में उनकी जयंती नवरात्र के पहले दिन (आश्विन मास की प्रतिपदा) को बड़े उत्साह से मनाई जाती है।

प्रेरक संदेश

“महाराजा अग्रसेन जी का जीवन बताता है कि अगर समाज मिलकर एक-दूसरे की मदद करे, तो हर व्यक्ति समृद्ध और सुखी रह सकता है।”