किसानों की विभिन्न गंभीर समस्याओं को लेकर भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के किसानों ने पैदल मार्च करते हुए गाज़ियाबाद कलेक्ट्रेट पहुँचकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा।
किसानों ने आरोप लगाया कि भूमि माप-जोख में भारी अनियमितताएँ की जा रही हैं। किसानों की जमीन का रकबा कम-ज्यादा किया जा रहा है और उसे सही करने के नाम पर अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा मनमानी व अवैध वसूली की जा रही है। किसानों का कहना है कि इस पूरे मामले की जानकारी प्रशासन को पहले से है, इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।
किसानों ने बताया कि वे इस समस्या को लेकर मुख्यमंत्री से भी विशेष रूप से मिल चुके हैं। मुख्यमंत्री द्वारा मुख्य सचिव के माध्यम से आदेश जारी किए गए थे और किसान स्वयं लखनऊ स्थित लोकभवन में उस समय मौजूद थे, लेकिन इसके बाद भी जमीन से जुड़ी लूट पर कोई रोक नहीं लग सकी।
ज्ञापन में यह भी बताया गया कि अब किसानों के पास बहुत कम जमीन बची है, जिससे उनकी आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है।
इसके अलावा, गांवों में गौशालाएँ होने के बावजूद छुट्टा पशु और नीलगाय खेतों में भारी नुकसान कर रही हैं, जिससे फसलें बर्बाद हो रही हैं।
किसानों ने धारा 116 से जुड़े मामलों को लेकर भी नाराजगी जताई और कहा कि ऐसे मामलों में किसान वर्षों तक चक्कर काटने को मजबूर होते हैं। दो-दो साल तक मुकदमे चलते हैं, जिसमें किसानों को वकीलों और बाबुओं को पैसे देने पड़ते हैं, लेकिन समयबद्ध निस्तारण नहीं होता।
ज्ञापन में सड़कों की बदहाल स्थिति का मुद्दा भी उठाया गया। किसानों का कहना है कि कई स्थानों पर पिछले 15–16 वर्षों से सड़कें टूटी पड़ी हैं, जिससे आवागमन में भारी परेशानी हो रही है
ज्ञापन में सड़कों की बदहाल स्थिति का मुद्दा भी उठाया गया। किसानों का कहना है कि कई स्थानों पर पिछले 15–16 वर्षों से सड़कें टूटी पड़ी हैं, जिससे आवागमन में भारी परेशानी हो रही है।
किसानों ने जलभराव की समस्या को भी प्रमुखता से उठाया। उनका कहना है कि गांवों में लगातार जलभराव रहने से बच्चों में संक्रमण और बीमारियाँ फैल रही हैं और गांव की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है।
भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के वरिष्ठ पदाधिकारी मांगे राम त्यागी ने जिलाधिकारी से सभी समस्याओं की निष्पक्ष जांच कर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
