गाज़ियाबाद। विश्व हिंदू महासंघ, गाज़ियाबाद की ओर से सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता का संदेश देते हुए कहा गया कि देश के महापुरुषों को जाति के आधार पर बाँटना समाज को विभाजित करने वाला कार्य है। संगठन ने कहा कि महापुरुषों का जीवन और उनके आदर्श पूरे समाज के लिए प्रेरणा हैं, इसलिए उन्हें किसी एक जाति या वर्ग तक सीमित करना उचित नहीं है।
राजेंद्र शर्मा, क्षेत्रीय महामंत्री (पश्चिम उत्तर प्रदेश) ने कहा कि महापुरुषों ने अपना जीवन राष्ट्र, समाज और मानवता की सेवा के लिए समर्पित किया। उनके विचार सभी के लिए समान रूप से प्रेरणादायक हैं। उन्हें जातीय पहचान तक सीमित करना उनके आदर्शों के विपरीत है और इससे सामाजिक समरसता प्रभावित होती है।
मनोज नागर, जिलाध्यक्ष, गाज़ियाबाद ने कहा कि समाज को जोड़ने का कार्य महापुरुषों के विचारों से ही संभव है। यदि हम उन्हें जातियों में बाँटेंगे, तो समाज में दूरियाँ बढ़ेंगी। उन्होंने सभी लोगों से आग्रह किया कि महापुरुषों का सम्मान उनके विचारों, त्याग और राष्ट्रसेवा के आधार पर करें।
अनुज (रामानुज), सोशल मीडिया प्रभारी, गाज़ियाबाद ने कहा कि आज समाज को जोड़ने की आवश्यकता है, न कि विभाजित करने की। महापुरुष किसी एक जाति, वर्ग या समुदाय की नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की साझा धरोहर हैं। उन्होंने युवाओं से सोशल मीडिया सहित हर मंच पर सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता का संदेश फैलाने का आह्वान किया।
विश्व हिंदू महासंघ ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे महापुरुषों के आदर्शों को अपनाकर समाज में सद्भाव, समानता और एकता को मजबूत करें तथा जातिवाद से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखें।
