उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले एक नया राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने अपनी नई राजनीतिक पार्टी ‘जन नीति भारत’ बनाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा है कि उनकी पार्टी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में हिस्सा लेगी। उनकी राजनीतिक पहल का मुख्य उद्देश्य जनता को नीति-निर्माण में भागीदार बनाना और सरकार को उसके कामकाज के लिए जवाबदेह बनाना है।
15 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में दिव्या मित्तल ने अपनी पार्टी के नाम और उसके प्रमुख सिद्धांतों की जानकारी दी। यह कदम IAS सेवा छोड़ने के बाद उनके राजनीतिक सफर की दिशा स्पष्ट करता है।
IAS से राजनीति तक: दिव्या मित्तल का नया सफर
दिव्या मित्तल 2013 बैच की IAS अधिकारी रही हैं। अपने प्रशासनिक करियर के दौरान वह उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर, देवरिया और संत कबीर नगर जैसे जिलों में जिलाधिकारी के पद पर काम कर चुकी हैं। उन्होंने 30 अगस्त 2026 को IAS सेवा से इस्तीफा देने का निर्णय लिया था, जिसे सितंबर में स्वीकार कर लिया गया।
29 सितंबर को उन्होंने राजनीति में आने की इच्छा सार्वजनिक की थी। अब अपनी पार्टी की घोषणा के साथ उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी स्थापित राजनीतिक दल में शामिल होने के बजाय अपना अलग राजनीतिक मंच तैयार करना चाहती हैं।
‘जन नीति भारत’ के तीन प्रमुख वचन
दिव्या मित्तल ने अपनी पार्टी की राजनीतिक सोच को तीन प्रमुख सिद्धांतों के माध्यम से सामने रखा है।
1. जनता की भागीदारी से बनेगी नीति
पार्टी का कहना है कि नीतियां बनाने में आम लोगों की राय को महत्व दिया जाना चाहिए। किसानों, व्यापारियों, अभिभावकों और गांवों में रहने वाले लोगों की समस्याओं को निर्णय प्रक्रिया में स्थान मिलना चाहिए।
2. पहचान नहीं, जरूरत के आधार पर निर्णय
दिव्या मित्तल के अनुसार, फैसले जाति, धर्म, प्रभाव या सामाजिक हैसियत के बजाय वास्तविक जरूरतों और समानता को ध्यान में रखकर होने चाहिए।
3. सरकार के काम का हिसाब देगी जनता
उनकी राजनीतिक पहल का तीसरा प्रमुख बिंदु जवाबदेही है। उनका कहना है कि जनता को केवल पांच साल में एक बार मतदान करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पूरे कार्यकाल में सरकार के कामकाज पर सवाल पूछने और उसकी समीक्षा करने का अधिकार मिलना चाहिए।
‘80 साल का हिसाब पूछना?’—जनता के सवालों की अहमियत
देश और प्रदेश की राजनीति में अक्सर विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सवाल उठते रहे हैं। चुनाव के समय राजनीतिक दल जनता के सामने अपने वादे रखते हैं, लेकिन असली कसौटी यह होती है कि सत्ता में आने के बाद उन वादों पर कितना काम हुआ।
दिव्या मित्तल की राजनीति में जवाबदेही पर जोर ऐसे समय में सामने आया है, जब मतदाता शासन और प्रशासन से परिणामों की अपेक्षा करते हैं। ‘80 साल का हिसाब पूछना?’ जैसे सवाल को इसी व्यापक लोकतांत्रिक बहस के संदर्भ में देखा जा सकता है।
हालांकि, इस सवाल को दिव्या मित्तल का प्रत्यक्ष बयान नहीं माना जाना चाहिए। यह जनता की जवाबदेही से जुड़ा एक संपादकीय प्रश्न है।
2027 में क्या होगी सबसे बड़ी चुनौती?
नई राजनीतिक पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने सिद्धांतों को जमीन पर उतारने की होगी। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में चुनाव लड़ने के लिए संगठन, कार्यकर्ता, स्थानीय नेतृत्व, संसाधन और प्रत्येक क्षेत्र की समस्याओं की समझ जरूरी होती है।
दिव्या मित्तल की प्रशासनिक पृष्ठभूमि उन्हें शासन व्यवस्था का अनुभव देती है, लेकिन चुनावी राजनीति में सफलता जनता के भरोसे, संगठन की मजबूती और ठोस कार्यक्रमों पर निर्भर करेगी।
फिलहाल पार्टी ने 2027 के विधानसभा चुनाव में उतरने का ऐलान किया है। उनकी चुनावी रणनीति, उम्मीदवारों और संगठन के विस्तार से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद ही राजनीतिक प्रभाव का बेहतर आकलन किया जा सकेगा।
आगे की रणनीति: वादों से जवाबदेही तक
‘जन नीति भारत’ की घोषणा ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नए विकल्प की चर्चा शुरू कर दी है। अब सवाल यह है कि जनता की भागीदारी और जवाबदेही के सिद्धांतों को व्यवहार में कैसे लागू किया जाएगा।
क्या आम नागरिक सरकारी कामकाज की नियमित निगरानी कर सकेंगे? क्या स्थानीय समस्याओं के समाधान की समयसीमा तय होगी? और क्या चुनावी वादों के साथ उनकी प्रगति का सार्वजनिक हिसाब भी दिया जाएगा?
इन सवालों के जवाब ही दिव्या मित्तल की राजनीतिक पहल की वास्तविक दिशा तय करेंगे।
