गाजियाबाद में पत्रकारों के साथ कथित अभद्रता और मारपीट का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। थाना विजयनगर और सिद्धार्थ विहार चौकी पुलिस पर पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार, गाली-गलौज और मारपीट करने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस पूरे घटनाक्रम के विरोध में ‘एक्टिव जर्नलिस्ट एसोसिएशन ट्रस्ट’ की अध्यक्ष अपूर्वा चौधरी के नेतृत्व में पत्रकारों ने पुलिस आयुक्त के नाम ज्ञापन सौंपकर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

पत्रकारों ने चेतावनी दी थी कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे परिवार सहित अन्न-जल त्यागकर भूख हड़ताल करेंगे और आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर होंगे। हालांकि एडिशनल पुलिस कमिश्नर केशव कुमार चौधरी द्वारा निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई का भरोसा दिए जाने के बाद फिलहाल पत्रकारों ने प्रशासन को तीन दिन का समय दिया है।

जानकारी के अनुसार यह पूरा मामला पत्रकार सुमन मिश्रा के साथ हुई कथित अभद्रता की शिकायत से जुड़ा हुआ है। शिकायत थाना विजयनगर में दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद मामले की जांच सिद्धार्थ विहार चौकी पुलिस को सौंप दी गई। आरोप है कि जब पत्रकार पक्ष अपनी शिकायत के संबंध में चौकी पहुंचा, उस समय आरोपी पक्ष भी वहां मौजूद था। पत्रकारों का कहना है कि आरोपी पक्ष पुलिस के सामने ही अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोकने के बजाय पत्रकारों के साथ ही बदसलूकी शुरू कर दी।

पत्रकारों का आरोप है कि इस दौरान भारत का बदलता शासन के संपादक ललित चौधरी के साथ चौकी पर मौजूद सब-इंस्पेक्टर आयुष कुमार और अन्य पुलिसकर्मियों ने बेहद अमर्यादित व्यवहार किया। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें जबरन धक्का देकर पुलिस वाहन में बैठाया और वाहन के अंदर उनके साथ मारपीट की। इतना ही नहीं, उनके साथ कथित रूप से अभद्र और असंसदीय भाषा का प्रयोग भी किया गया।

घटना से नाराज पत्रकार जब अपनी शिकायत लेकर थाना विजयनगर पहुंचे तो वहां भी उन्हें राहत नहीं मिली। पत्रकारों का आरोप है कि थाना प्रभारी ने उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें धमकाया और कार्यालय से बाहर जाने के लिए कहा। इससे नाराज पत्रकार थाने के बाहर धरने पर बैठ गए। बताया जा रहा है कि वरिष्ठ अधिकारियों को फोन पर सूचना देने के लगभग एक घंटे बाद थाना प्रभारी ने पत्रकारों का पक्ष सुना।

इस पूरे मामले को लेकर पत्रकार संगठनों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। एक्टिव जर्नलिस्ट एसोसिएशन ट्रस्ट की अध्यक्ष अपूर्वा चौधरी ने कहा कि पत्रकार समाज का आईना होते हैं और निष्पक्ष रूप से जनता की आवाज उठाने का काम करते हैं। ऐसे में यदि पत्रकारों के साथ ही इस तरह का व्यवहार होगा तो लोकतंत्र की मूल भावना को ठेस पहुंचेगी। उन्होंने कहा कि यह घटना केवल कुछ पत्रकारों का अपमान नहीं बल्कि पूरे पत्रकार समाज के सम्मान पर हमला है।

अपूर्वा चौधरी ने कहा कि पत्रकार अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए दिन-रात समाज के बीच काम करते हैं। अपराध, भ्रष्टाचार और जनसमस्याओं को सामने लाने का कार्य पत्रकारिता के माध्यम से ही संभव हो पाता है। यदि पत्रकार खुद ही असुरक्षित महसूस करेंगे तो लोकतंत्र कमजोर होगा। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की।

पत्रकारों के प्रतिनिधिमंडल ने बाद में एडिशनल पुलिस कमिश्नर केशव कुमार चौधरी से मुलाकात की और उन्हें पूरे मामले की जानकारी देते हुए ज्ञापन सौंपा। बताया जा रहा है कि एडिशनल सीपी ने लगभग आधे घंटे तक पत्रकारों की बात गंभीरता से सुनी और निष्पक्ष जांच कराने का भरोसा दिया।

आश्वासन के बाद पत्रकारों ने प्रस्तावित भूख हड़ताल को फिलहाल तीन दिनों के लिए स्थगित कर दिया है। पत्रकारों की मांग है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कर संबंधित पुलिसकर्मियों पर कानूनी कार्रवाई की जाए।

मामले की प्रतिलिपि और के पुलिस महानिदेशक (DGP) को भी भेजी गई है। पत्रकार संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा में कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।